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विषय परिवर्तन :


विश्वविद्यालय के मानकानुसार प्रवेश प्राप्त कर लेने के बाद यदि कोई छात्रा अपना विषय परिवर्तन करना चाहते हैं तो उसे सम्बंधित विषयों के विभागाध्यक्ष एवं प्राचार्य की लिखित अनुमति प्राप्त करनी होगी | विषय परिवर्तन फार्म जमा करने से पूर्व ही सम्भव होगा | गैर-प्रयोगात्मक विषयो से प्रयोगात्मक विषयों में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को निर्धारित प्रयोगात्मक शुल्क जमा करने के बाद ही बाद ही विषय परिवर्तन हो सकेगा | प्रयोगात्मक विषय छोड़कर गैर प्रयोगात्मक गैर प्रयोगात्मक विषय लेने वाली छात्राओं को किसी भी दशा में प्रयोगात्मक शुल्क की वापसी सम्भव न हो सकेगी |
प्रवेश के लिए आवंटित विषयों के अतिरिक्त परीक्षा आवेदन पत्र में स्वेच्छया भरे गये विषय मान्य नहीं होगे तथा उक्त विषय की परीक्षा में उन्हें सम्मिलित होने की अनुमति नहीं हो सकेगी |

परिचय पत्र :

  • महाविद्यालय में प्रवेश लेने के तत्काल बाद ही प्रत्येक छात्रा को महाविद्यालय कार्यालय में अपना पंजीकरण कराकर परिचय पत्र लेना अनिवार्य हैं
  • परिचय पत्र खो जाने पर इसकी दूसरी प्रति प्रार्थना पत्र एवं 25/- जमा करने पर प्राप्त हो सकेगा

पुस्तकालय एवं वाचनालय :


महाविद्यालय में विविध विषयो की पुस्तकों एवं पत्रिकाओं से परिपूर्ण पुस्तकालय एवं संलग्न वाचनालय हैं | महाविद्यलाय में पुस्तकालयाध्यक्ष द्वारा निर्देशित नियम के अन्तर्गत निश्चित अवधि के लिए प्रत्येक छात्रा पुस्तके प्राप्त कर सकेगी | वाचनालय में प्रत्येक विषय से सम्बंधित पत्र-पत्रिकाए एवं जर्नल्स उपलब्ध होने | पुस्तकालय एवं वाचनालय में सम्बंधित व्यवस्था हेतु पुस्तकालयाध्यक्ष के निर्देश अंतिम रूप में मान्य होगें | प्रवेश लेने के 15 दिनों के अन्दर या पुस्ताकालयाध्य द्वारा निश्चित तिथि तक छात्रा द्वारा पुस्तकालय कार्ड बनवा लेना होगा, अन्यथा छात्रा पुस्तकालय की सुविधा से वंचित रहेगी | पुस्तकालय कार्ड खो जाने पर आवेदन पत्र के साथ रु 10/- शुल्क जमा करने पर पुस्तकालय कार्ड की द्वितीय प्रति प्राप्त किया जा सकेगा | पुस्तकालय कार्ड बनवाने के लिए प्रवेशार्थी को प्रवेश रसीद के साथ उपस्तिथि अनिवार्य होगी तथा पुस्तकें प्राप्त करने हेतु भी पुस्तकालय कार्ड के साथ छात्रा की उपस्तिथि आवश्यक हैं |

खेल – कूद :


महाविद्यालय में छात्राओं के शरीर सौष्ठव के एवं खेलकूद में उनकी निपुणता तथा विकास हेतु क्रीड़ा-सम्बन्धी समस्य अंतरित एवं बाह्य क्रीड़ा सुविधाएँ उपलब्ध हैं | महाविद्यालय के पास अपना क्रीड़ागन | खेलकूद सम्बन्धी सुविधा प्रदान करने के लिए महाविद्यालय द्वारा क्रीड़ा अधिक्षक नियुक्त हैं | जिनकी देख-रेख में इनडोर तथा आउटडोर खेलों एवं विविध प्रकार की व्यायाम सुविधाओं की प्राप्ति सम्भव हैं | क्रीड़ा-सम्बन्धी उपकरण/सामग्री किसी भी खिलाडी छात्रा को घर के लिए सुलभ न हो सकेगी | खिलाडियों का चयन क्रीड़ा-अधीक्षक की देख रेख में किया जाता हैं |

राष्ट्रीय सेवा योजना :


भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के युवा कार्य विभाग के सौजन्य से महाविद्यालय में इस योजना की एक इकाई 2007-08 से संचालित है | जिसका प्रमुख उद्देश्य शिक्षा के साथ राष्ट्र-सेवा हैं | समय-समय पर राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से शिविर लगाकर वृक्षारोपण, मलिन बस्तियों की सफाई एवं मार्ग निमार्ण जैसे सार्वजनिक हित के कार्य किये जाते हैं | इस योजना में सहभागिता के इच्छुक छात्राओं को महाविद्यालय में प्रवेश पाने के बाद निर्धारित आवेदन-पत्र भर कर राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यालय में जमा करना होगा | इकाई में प्रतिवर्ष छात्राओं का चयन साक्षात्कार के आधार पर एक समिति के द्वारा किया जाता हैं जिसमें केवल स्नातक स्तर की छात्रा ही सदस्य ( स्वयंसेवक ) चुने जाते हैं | प्रथम एवं द्वतीय वर्ष में 120-120 घंटे सार्वजनिक सेवा कार्य करने वाली छात्राओं का दो वर्षो की अवच्छिन्न सदस्यता अवधि पूरा करने पर प्रमाण-पत्र दिए जाते हैं |

रोवर्स एवं रेंजर्स :


महाविद्यालय में छात्राओं के शिक्षणत्तर क्रिया-कलापों के संवार्द्धानार्थ रोजर्स एवं रेंजर्स की इकाई कार्यरत हैं | महाविद्यालय में रोवर्स/रेंजर्स का सर्टिफिकेट कोर्स का संचालन किया जाता हैं|

  • बी० ए० प्रथम वर्ष – प्रवेश
  • बी० ए० द्वीतीय वर्ष – प्रवीण
  • बी० ए० तृतीय – निपुण

सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं शैक्षिक भ्रमण :


महाविद्यालय में समय-समय पर निर्धारित कसांस्कृतिक कार्यक्रम,वन विहार ( पिकनिक ) एवं शैक्षिक भ्रमण कराया जाता हैं |
अनुशासन :
महाविद्यालय छात्रा-जीवन में अनुशासन को सर्वोच्च मान्यता देता हैं | महाविस्यालय में प्रवेश पाने वाली प्रत्येक छात्रा से निर्दिष्ट अनुशासन एवं उत्तम आचरण की अपेक्षा की  जाती हैं | यदि कोई छात्रा अनुशासनहीनता, चरित्रहीनता अथवा किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार की दोषी पायी जाती हैं तो प्राचार्य, अनुशासनाधिकारी की संस्तुति पर अपराध की प्रकृति के अनुसार निम्नलिखित दंड दे सकते हैं |

  • अर्थदण्ड
  • निलम्बन
  • निष्कासन
  • निस्सारण

 

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Sushila Rai Mahila Mahavidyalaya, Sarai Mohan, Azamgarh

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